गुदा द्वार में सूजन की समस्या सिर्फ शारीरिक तकलीफ़ ही नहीं, यह आपकी आत्मविश्वास और नॉर्मल लाइफ को भी प्रभावित कर सकती है। इस पेज में हम बताएंगे कि fissure kya hota hai, इसके कारण, लक्षण, और कैसे आधुनिक चिकित्सा के ज़रिए कामयाबी से इलाज किया जा सकता है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
ऐसे लक्षण जिन पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए
- मल त्याग के समय या बाद में तेज़ जलन या दर्द
- गुदा द्वार से खून आना या लाल धब्बे
- सूजन, गांठ या मवाद निकलना
- दर्द के कारण बैठना मुश्किल होना
- लगातार कब्ज और मल त्याग में कठिनाई
फिशर के लक्षण
ऐसे संकेत जिनसे आप पहचान सकते हैं कि आपको फिशर है
- मल त्याग के बाद तीव्र जलन या चुभन जैसा दर्द
- टॉयलेट पेपर पर खून के निशान
- गुदाद्वार में कट या दरार जैसा महसूस होना
- बैठते समय असहजता या तेज़ खिंचाव
- जलन जो कई घंटों तक बनी रहे
फिशर होने के कारण
फिशर किन वजहों से होता है, इसे इन श्रेणियों में समझें
- जीवनशैली से जुड़े कारण: लंबे समय तक बैठना, व्यायाम की कमी
- आहार संबंधी कारण: कम फाइबर वाला भोजन, पानी कम पीना
- शौच संबंधी आदतें: मल को रोकना, ज़ोर लगाकर मल त्यागना
- अन्य कारक: कब्ज, गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद तनाव, बवासीर
फिशर की पहचान कैसे होती है?
डॉक्टर किस तरह से जांच करते हैं, जानिए चरणबद्ध तरीके से
- मरीज की इतिहास (medical history) और लक्षणों की जानकारी ली जाती है
- बाहरी निरीक्षण से गुदा द्वार के आसपास की स्थिति देखी जाती है
- डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम के ज़रिए डॉक्टर दस्ताने वाली उंगली से जांच करते हैं
- आवश्यकता होने पर एनोस्कोपी की जाती है जिससे अंदर की सतह देखी जा सके
- यह जांच थोड़ी असहज हो सकती है लेकिन दर्द बहुत मामूली होता है, और डॉक्टर प्रक्रिया के दौरान समझाते चलते हैं
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उन्नत फिशर उपचार विकल्प
फिशर के लिए कौन-कौन से इलाज उपलब्ध हैं और किसके लिए उपयुक्त हैं
1. दवाओं द्वारा इलाज
- क्या है: ओइंटमेंट, क्रीम, सिट्ज बाथ और फाइबर सप्लीमेंट
- किसके लिए: हल्के और शुरुआती फिशर वाले मरीज
- क्या आप होश में रहेंगे?: हाँ
- रिकवरी टाइम: 1–2 हफ्ते
- कैसे काम करता है: आप दर्द निवारक और घाव भरने वाली क्रीम लगाते हैं। गर्म पानी में बैठने से आराम मिलता है।
2. बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्शन
- क्या है: एक इंजेक्शन जो मांसपेशियों को ढीला करता है
- किसके लिए: पुराने और बार-बार होने वाले फिशर
- क्या आप होश में रहेंगे?: हाँ
- रिकवरी टाइम: 2–3 दिन
- कैसे काम करता है: आपको गुदा मांसपेशियों में एक छोटा इंजेक्शन दिया जाता है जिससे खिंचाव और दर्द कम हो जाता है।
3. लैटरल इंटरनल स्फिंक्टेरोटॉमी
- क्या है: सर्जिकल प्रक्रिया जिसमें अंदरूनी मांसपेशियों को हल्का काटा जाता है
- किसके लिए: गंभीर या लगातार दोहराने वाले फिशर
- क्या आप होश में रहेंगे?: नहीं, स्थानीय या सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाएगा
- रिकवरी टाइम: 7–10 दिन
- कैसे काम करता है: ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर आपकी गुदा की मांसपेशी को थोड़ा काटते हैं जिससे दर्द में राहत मिलती है और घाव भरने लगता है।
सही इलाज का चुनाव कैसे किया जाता है
डॉक्टर आपके लिए सबसे बेहतर इलाज कैसे तय करते हैं:
- फिशर की स्थिति और गंभीरता
- लक्षणों की अवधि और तीव्रता
- पहले से मौजूद बीमारियाँ या स्वास्थ्य समस्याएँ
- आपकी रोज़मर्रा की जीवनशैली और प्राथमिकताएं
- आप किस तरह का इलाज चाहते हैं – दवा, नॉन-सर्जिकल या सर्जिकल
इलाज से पहले, दौरान और बाद में क्या अपेक्षा करें
इलाज की पूरी प्रक्रिया को तीन हिस्सों में समझिए:
| चरण | विवरण |
|---|---|
| इलाज से पहले | 6 घंटे का उपवास, कुछ जांचें, आरामदायक कपड़े, कब्ज की दवा |
| इलाज के दौरान | लोकल या जनरल एनेस्थीसिया, OPD या ओटी में प्रक्रिया, डॉक्टर मॉनिटर करता है |
| इलाज के बाद | सिट्ज बाथ, हल्का खाना, दवा नियमित, ऑफिस 2–3 दिन बाद जा सकते हैं |
मिनिमली इनवेसिव इलाज के फायदे
उन्नत तकनीक वाले इलाज क्यों ज़्यादा फायदेमंद होते हैं:
- दर्द बहुत कम या ना के बराबर
- कोई बड़ा चीरा नहीं
- एक ही दिन में अस्पताल से छुट्टी
- जल्दी और आरामदायक रिकवरी
- टांकों की ज़रूरत नहीं
- दोबारा होने की संभावना कम
इलाज के बाद रिकवरी टाइमलाइन
हर इलाज के बाद कैसा होता है रिकवरी का सफर
दवाओं से
- दिन 1–3: जलन में राहत, मल थोड़ा सख्त हो सकता है
- दिन 4–7: फाइबर बढ़ाएं, कब्ज न होने दें
- दिन 8+: सामान्य दिनचर्या
बोटुलिनम इंजेक्शन
- दिन 1–2: इंजेक्शन वाली जगह पर हल्की चुभन
- दिन 3–7: बैठना आसान, मल त्याग में आराम
- दिन 8+: ऑफिस या सफर कर सकते हैं
सर्जरी (LIS)
- सप्ताह 1: आराम, सिट्ज बाथ, मल नरम रखने की दवा
- सप्ताह 2: हल्का व्यायाम शुरू करें
- सप्ताह 3+: बिना दर्द के सामान्य जीवन
चेतावनी संकेत: अत्यधिक खून, तेज़ दर्द, बुखार—तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
फिशर दोबारा न हो इसके लिए क्या करें
जीवनशैली में कुछ बदलाव आपको इस बीमारी से बचा सकते हैं:
- हर दिन 8–10 गिलास पानी पिएं
- फाइबर से भरपूर खाना खाएं: फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज
- मल को रोकें नहीं—देर करने से कब्ज होता है
- शौच के समय पाँव थोड़ा ऊपर रखें
- तनाव कम करें और हल्की सैर को दिनचर्या में शामिल करें
- डॉक्टर से नियमित जांच कराएं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- इलाज के बाद खान-पान में क्या ध्यान रखें?
ताजे फल, हरी सब्ज़ी, साबुत अनाज और भरपूर पानी लेना ज़रूरी है।
2. फिशर कितने दिनों में ठीक हो जाता है?
हल्के मामलों में 1 से 2 हफ्ते में आराम मिल जाता है।
3. क्या फिशर खुद से ठीक हो सकता है?
कुछ मामलों में हाँ, पर दर्द या खून बार-बार हो तो डॉक्टर से मिलें।
4. क्या ऑपरेशन ज़रूरी होता है?
जब दवा या अन्य उपायों से आराम न हो, तब सर्जरी ज़रूरी होती है।
5. क्या इलाज के बाद बैठना मुश्किल होगा?
शुरू के 1–2 दिन हल्की परेशानी हो सकती है।
6. क्या यह दोबारा हो सकता है?
अगर जीवनशैली में बदलाव न हो तो हाँ, दोबारा हो सकता है।
7. क्या इलाज में दर्द होता है?
न्यूनतम दर्द होता है और वह भी दवाओं से काबू में रहता है।
8. क्या यह बीमारी पुरुषों में ही होती है?
नहीं, यह स्त्रियों में भी उतनी ही आम है, खासकर डिलीवरी के बाद।
9. क्या ऑफिस जल्दी जा सकते हैं?
हाँ, अधिकतर मरीज 2–3 दिन में काम पर लौटते हैं।
10. क्या insurance कवर करता है?
हाँ, कई योजनाएं मिनिमली इनवेसिव इलाज को कवर करती हैं।
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। कोई भी चिकित्सा निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।







